बिहार के समस्तीपुर जिले के सिंघिया प्रखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत जहांगीरपुर ( कोल्हुआघाट ) में जहाँ करेह नदी की नहर में जेसीबी मशीन से किए जा रहे उड़ाहीकरण कार्य
स्थानीय मजदूरों और ग्रामीणों ने इस कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए विरोध शुरू कर दिया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जिस काम से सैकड़ों गरीब मजदूरों को रोजगार मिल सकता था, उसे मशीनों के जरिए कराकर उनकी आजीविका छीन ली गई। इतना ही नहीं, कुछ लोगों ने पूरे मामले में सरकारी धन के संभावित दुरुपयोग की आशंका जताते हुए उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग भी की है।
उनका कहना है कि यदि यही कार्य स्थानीय मजदूरों को दिया जाता, तो क्षेत्र के गरीब परिवारों को कई दिनों तक रोजगार भी मिलता। इससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होता और सरकारी योजनाओं का उद्देश्य भी पूरा होता।
विरोध कर रहे मजदूरों का कहना है कि आज महंगाई लगातार बढ़ रही है। दिहाड़ी मजदूरी ही उनके परिवार की आय का मुख्य साधन है। ऐसे में जब सरकारी कार्यों में भी मशीनों का उपयोग होने लगेगा, तो गरीब मजदूर आखिर काम कहाँ करेंगे?
मजदूर ने कहा कि कई परिवार रोज कमाते हैं और उसी कमाई से अपने बच्चों की पढ़ाई, भोजन और अन्य जरूरी खर्च पूरे करते हैं। यदि ऐसे कार्यों में भी उन्हें रोजगार नहीं मिलेगा, तो उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने की बात करती है। लेकिन यदि उन्हीं योजनाओं में मशीनों से काम कराया जाएगा, तो गरीब मजदूरों को मिलने वाला रोजगार समाप्त हो जाएगा।
उनका कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता, नियमों के उल्लंघन या सरकारी धन के दुरुपयोग के तथ्य सामने आते हैं, तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि सरकारी योजनाओं का पैसा जनता के हित में खर्च होना चाहिए और प्रत्येक कार्य पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाना चाहिए।
ग्रामीणों और मजदूरों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
उनका कहना है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक यदि आवश्यक हो तो कार्य की समीक्षा की जाए और यदि कहीं नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएँ।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है, क्या पूरे मामले की जांच कराई जाती है और क्या जांच के बाद कोई ठोस कार्रवाई सामने आती है।









