राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में बड़ी सुनवाई, CBI जांच और फोरेंसिक ऑडिट की मांग

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के आरोपों से जुड़ी याचिकाओँ पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ मामले की स्वतंत्र जांच की मांग वाली तीन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।
पीठ में सीजेआइ के अलावा न्यायाधीश जोयमाल्या बाग्ची और वी. मोहना शामिल होंगी। तीन में से दो याचिकाओं में सीबीआइ से जांच कराने की मांग की गई है।
गर्मियों की छुट्टियों के बाद सोमवार से सुप्रीम कोर्ट नियमित रूप से खुल रहा है। सोमवार से जब कोर्ट नियमित सुनवाई के लिए बैठेगा उसी दिन राम जन्मभूमि चढ़ावा चोरी से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई की जाएगी।
सोमवार की सुनवाई सूची में ये याचिकाएं शामिल हैं। जो तीन याचिकाएं लंबित हैं उनमें एक याचिका वकील नरेन्द्र कुमार गोस्वामी ने दाखिल की है जिसमें गोस्वामी ने मामले की सीबीआइ जांच कराने की मांग की है साथ ही अयोध्या राम जन्मभूमि का प्रबंधन देख रहे राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय मामलों का सीएजी से ऑडिट कराने की भी मांग की है।
दूसरी याचिका अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव की है इसमें भी सीबीआइ जांच की मांग की गई है। तीसरी याचिका आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह ने दाखिल की है।
इस याचिका में घोटाले को देखते हुए मंदिर ट्रस्ट के सभी वित्तीय मामलों की फारेंसिक आडिट कराने की मांग की गई है। दाखिल जनहित याचिका में सबूतों के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ रोकने के लिए सभी वित्तीय रिकॉर्ड, जैसे फिजिकल दस्तावेज, डिजिटल लेजर, यूपीआइ ट्रांसेक्शन लॉग और बैंक स्टेटमेंट सुरक्षित रखने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
यह भी मांग है कि ट्रस्ट को प्रस्तावित निगरानी समिति की पूर्व मंजूरी के बिना बड़े निवेश करने, बड़े कॉन्ट्रेक्ट करने या महत्वपूर्ण वित्तीय निर्णय लेने से रोका जाए।
याचिका में एक स्वतंत्र एजेंसी से ट्रस्ट के सभी चंदे, लेनदेन और संपत्तियों की व्यापक फोरेंसिक ऑडिट कराने की भी मांग है। इसमें यह भी अनुरोध किया गया है कि ट्रस्ट को सार्वजनिक पारदर्शिता के हित में अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर ऑडिट किये गए वित्तीय स्टेटमेंट और चंदे के रिकॉर्ड प्रकाशित करने का निर्देश दिया जाए।
यह भी अनुरोध है कि जांच पूरी होने तक ट्रस्ट के फंड का इस्तेमाल, बड़े कॉन्ट्रेक्ट देना, तीसरे पक्ष के अधिकार बनाना, ट्रस्ट की संपत्तियों का हस्तांतरण, निवेश या अन्य महत्वपूर्ण वित्तीय प्रतिबद्धताओं से जुड़े कोई भी बड़े वित्तीय या प्रशासनिक निर्णय , प्रस्तावित कोर्ट निगरानी वाली निगरानी समिति की मंजूरी के बिना न लिए जाएं।
इसके अलावा याचिका में मांग की गई है कि ट्रस्ट के खातों, दान, चढ़ावे, बैंक ट्रांजेक्शन, और वित्तीय रिकार्ड का एक भरोसेमंद और निष्पक्ष एजेंसी से फारेंसिक ऑडिट कराया जाए और ऑडिट रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश की जाए।
साथ ही जरूरत पड़ने पर दान देने वालों की गोपनीय या संवेदनशील जानकारी को सुरक्षित रखें। ये भी मांग है कि ट्रस्ट को निर्देश दिया जाए कि वह अपने गठन के समय से मिले सभी दान और योगदान का ब्योरा कोर्ट के सामने रखे।
इसमें नगद दान, बैंक ट्रांसफर, डिजिटल पेमेंट, विदेशी योगदान, सामान के रूप में मिला दान, सोना चांदी और दूसरी कीमती चीजें शामिल हैं। साथ ही उनके एकाउंटिंग, कस्टडी और इस्तेमाल के बारे में भी जानकारी दी जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने आंशिक कार्यदिवस के दौरान मामले पर जल्द सुनवाई की मांग ठुकरा दी थी। इलाहाबाद हाई कोर्ट में भी ऐसी ही राहत की मांग वाली याचिकाएं लंबित हैं।
इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआइटी जांच कर रही है और एफआइआर दर्ज कर आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

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