समस्तीपुर जिले के सिंघिया प्रखंड में टीबी मुक्त भारत अभियान को सफल बनाने के उद्देश्य से जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिंघिया के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. एम.एम. अंसारी ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि टीबी एक गंभीर बीमारी जरूर है, लेकिन समय पर पहचान और नियमित इलाज से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि आज भी कई लोग जानकारी के अभाव में टीबी के लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। इसलिए यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक लगातार खांसी, बलगम में खून आना, लगातार बुखार, वजन कम होना, रात में अत्यधिक पसीना आना या कमजोरी महसूस हो, तो उसे तुरंत नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर जांच करानी चाहिए।
डॉ. अंसारी ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में टीबी की जांच और दवाइयां पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी तरह की झिझक या डर के बिना जांच कराएं और यदि टीबी की पुष्टि होती है तो डॉक्टर द्वारा निर्धारित पूरा इलाज अवश्य करें। बीच में दवा छोड़ना मरीज और समाज दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि टीबी मरीजों के साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करना चाहिए। परिवार और समाज का सहयोग मरीज के शीघ्र स्वस्थ होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों ने लोगों को टीबी के कारण, लक्षण, बचाव और उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी। साथ ही ग्रामीणों से अपील की गई कि वे अपने आसपास किसी भी संदिग्ध मरीज की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को दें, ताकि समय रहते उसकी जांच और उपचार शुरू किया जा सके।
डॉ. एम.एम. अंसारी ने कहा कि प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक कर रहा है।









