बिहार में सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों की दैनिक उपस्थिति को लेकर शिक्षा विभाग ने निगरानी व्यवस्था सख्त कर दी है। ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर शिक्षकों की उपस्थिति का विस्तृत ब्योरा जुटाने और उसकी समीक्षा करने के लिए विभाग ने सभी जिलों को दो दिनों के भीतर अद्यतन रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इस संबंध में शिक्षा विभाग के प्रशासन निदेशक विजय कुमार पाण्डेय ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (डीईओ) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (स्थापना) को महत्वपूर्ण पत्र जारी किया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सटीक और त्रुटिरहित रिपोर्ट उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए।
इस निर्देश के बाद समस्तीपुर समेत राज्य के सभी जिलों में ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर दर्ज शिक्षकों की उपस्थिति के आंकड़ों की समीक्षा की जा रही है। जिला और प्रखंड स्तर पर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक विवरण जुटाकर रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। शिक्षा विभाग इस प्रक्रिया के माध्यम से यह पता लगाना चाहता है कि विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक पोर्टल पर अपनी दैनिक उपस्थिति किस प्रकार दर्ज कर रहे हैं और कहां-कहां उपस्थिति दर्ज करने में कमी सामने आ रही है।
उपस्थिति के चार बिंदुओं पर मांगी गई जानकारी
शिक्षा विभाग ने ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर दर्ज उपस्थिति के संबंध में चार प्रमुख श्रेणियों में विस्तृत आंकड़े मांगे हैं। इसके तहत सभी शिक्षकों की उपस्थिति की स्थिति का अलग-अलग ब्योरा तैयार करना होगा, ताकि वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके।
पहली श्रेणी में उन शिक्षकों की जानकारी मांगी गई है, जो पोर्टल पर विद्यालय आने के समय ‘इन’ (In) और विद्यालय से जाने के समय ‘आउट’ (Out) दोनों की उपस्थिति दर्ज करते हैं। इससे यह पता चलेगा कि कितने शिक्षक निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपनी दैनिक उपस्थिति पूरी कर रहे हैं।
दूसरी श्रेणी में ऐसे शिक्षकों का विवरण तैयार किया जाएगा, जो विद्यालय आने के समय की उपस्थिति तो दर्ज करते हैं, लेकिन वापस जाने के समय ‘आउट’ की एंट्री नहीं करते हैं। विभाग इन आंकड़ों के माध्यम से यह जानना चाहता है कि इस श्रेणी में कितने शिक्षक शामिल हैं और उनकी उपस्थिति संबंधी स्थिति क्या है।
तीसरी श्रेणी में उन शिक्षकों का आंकड़ा मांगा गया है, जो ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर बिल्कुल भी उपस्थिति दर्ज नहीं करते हैं। ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार कर संबंधित विवरण का सत्यापन किया जाएगा, ताकि उपस्थिति दर्ज नहीं होने के कारणों का पता लगाया जा सके।
वहीं, चौथी श्रेणी में ‘मार्क ऑन ड्यूटी’ (Mark on Duty) के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करने वाले शिक्षकों की जानकारी अलग से उपलब्ध करानी होगी। इससे विभाग को यह समझने में मदद मिलेगी कि कितने शिक्षक इस विकल्प का उपयोग कर रहे हैं और उनके संबंध में दर्ज आंकड़े क्या हैं।
दो दिनों के भीतर भौतिक सत्यापन के साथ देनी होगी रिपोर्ट
शिक्षा विभाग के निर्देश के अनुसार, सभी जिलों को इन चारों श्रेणियों से संबंधित आंकड़े एकत्र कर स्पष्ट और विस्तृत प्रतिवेदन तैयार करना होगा। केवल पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर रिपोर्ट तैयार करने के बजाय उनका समुचित भौतिक सत्यापन भी सुनिश्चित करने को कहा गया है।
विभाग ने रिपोर्ट भेजने के लिए दो दिनों की समय सीमा निर्धारित की है। ऐसे में जिला शिक्षा कार्यालयों को संबंधित प्रखंडों और विद्यालयों से आवश्यक जानकारी जुटाकर निर्धारित अवधि के भीतर रिपोर्ट संकलित करनी होगी। रिपोर्ट में किसी तरह की त्रुटि या विसंगति नहीं रहे, इसके लिए आंकड़ों की जांच पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होगी।
इस आदेश को शिक्षा विभाग ने प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने का निर्देश दिया है। समय सीमा कम होने के कारण संबंधित अधिकारियों और कर्मियों को तेजी से आंकड़े जुटाने तथा उनकी समीक्षा करने की जरूरत है।
समस्तीपुर में भी शुरू हुई आंकड़ों की समीक्षा
मुख्यालय से निर्देश जारी होने के बाद समस्तीपुर जिले में भी ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर उपलब्ध शिक्षकों की उपस्थिति संबंधी आंकड़ों की समीक्षा की जा रही है। जिला शिक्षा कार्यालय को निर्धारित समय के भीतर सभी संबंधित प्रखंडों से रिपोर्ट प्राप्त कर उसका संकलन करना होगा।
डीईओ कामेश्वर प्रसाद गुप्ता ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि विभाग ने उपस्थिति की चार अलग-अलग श्रेणियों में आंकड़े मांगे हैं। इसके अनुसार रिपोर्ट तैयार करने और निर्धारित प्रक्रिया के तहत विवरण उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जा रही है।
जिला स्तर पर रिपोर्ट तैयार करने के दौरान यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा कि पोर्टल पर दर्ज विवरण और संबंधित विद्यालयों से प्राप्त जानकारी में किसी प्रकार का अंतर नहीं हो। इसके लिए आवश्यकतानुसार आंकड़ों का सत्यापन कर रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा।
लापरवाही पर कार्रवाई की आशंका
शिक्षा विभाग के इस सख्त निर्देश के बाद शिक्षकों की दैनिक उपस्थिति और रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया को लेकर विभागीय स्तर पर गतिविधियां तेज होने की संभावना है। दो दिनों के भीतर रिपोर्ट उपलब्ध कराने की समय सीमा के कारण अधिकारियों और संबंधित कर्मियों को निर्धारित समय में कार्य पूरा करना होगा।
उपस्थिति संबंधी आंकड़ों की समीक्षा से विभाग को यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि कितने शिक्षक नियमित रूप से इन और आउट की उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं तथा किन मामलों में उपस्थिति अधूरी या अनुपस्थित है। इसके आधार पर विभाग आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने पर विचार कर सकता है।
हालांकि, पोर्टल पर उपस्थिति दर्ज नहीं होने या अधूरी एंट्री मिलने का अर्थ अपने आप में अनुपस्थिति या लापरवाही साबित होना नहीं है। ऐसे मामलों में संबंधित परिस्थितियों और उपलब्ध अभिलेखों की जांच जरूरी होगी।
फिलहाल, शिक्षा विभाग के निर्देश के बाद सभी जिलों में ई-शिक्षाकोष पोर्टल के आंकड़ों को संकलित करने और उनका सत्यापन करने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि निर्धारित दो दिनों के भीतर रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय को भेजी जाती है या नहीं और समीक्षा के बाद विभाग आगे क्या कदम उठाता है।








