अमेरिका का गैंगस्टर बनकर शराब ठेकेदार से मांगी रंगदारी

गुरुग्राम पुलिस ने ‘वर्चुअल नंबर’ वाले गैंग का किया भंडाफोड़
गुरुग्राम में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां इंटरनेट का इस्तेमाल कर विदेशी नंबर से शराब ठेका मालिक से लाखों रुपये की रंगदारी मांगी गई। खुद को अमेरिका में बैठा गैंगस्टर बताने वाले इस गिरोह का गुरुग्राम की फरुखनगर क्राइम ब्रांच ने सफलतापूर्वक पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस ने इस मामले में एक नाबालिग समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिससे यह साफ हो गया है कि तकनीक की आड़ में छिपकर अपराध करना अब मुमकिन नहीं है।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, फरुखनगर के एक शराब लाइसेंस धारक ने 27 अक्टूबर को थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित के मुताबिक, 25 अक्टूबर की दोपहर करीब साढ़े 12 बजे उनके फोन पर एक विदेशी नंबर से कॉल आई थी। कॉल करने वाले ने खुद को अमेरिका का कुख्यात गैंगस्टर बताया और लाखों रुपये की डिमांड की। पैसे न देने पर जान से मारने और गंभीर अंजाम भुगतने की धमकी दी गई थी।
मास्टरमाइंड निकला कोर्ट का मुंशी
बुधवार को केस दर्ज होने के बाद अपराध शाखा फरुखनगर के उप-निरीक्षक लोकेश कुमार की टीम ने साइबर तकनीक की मदद से जांच शुरू की। गुरुवार को पुलिस ने दोनों आरोपियों को दबोच लिया। मुख्य आरोपी की पहचान सुमित कुमार (निवासी सिकंदरपुर बढ़ा, खेड़कीदौला) के रूप में हुई है, जो गुरुग्राम कोर्ट में एक वकील के पास मुंशी का काम करता है। उसका दूसरा साथी एक नाबालिग है।
कैसे रची गई रंगदारी की साजिश?
एसीपी क्राइम इंदीवर कुमार ने बताया कि सुमित ने इंटरनेट के जरिए एक विदेशी ‘वर्चुअल नंबर’ जेनरेट किया था। साजिश के तहत, शराब कारोबारी को धमकी भरा फोन नाबालिग ने किया था, ताकि शक किसी और पर जाए। वहीं, रंगदारी की रकम सुमित को वसूलनी थी। पुलिस फिलहाल वारदात में इस्तेमाल मोबाइल फोन बरामद करने और आरोपियों के किसी बड़े आपराधिक गिरोह से कनेक्शन की गहन जांच कर रही है।
गुरुग्राम पुलिस की सख्त चेतावनी
इस कार्रवाई के बाद गुरुग्राम पुलिस ने साफ संदेश दिया है कि ‘वर्चुअल नंबर’ पूरी तरह से ट्रेस किए जा सकते हैं। जो अपराधी यह गलतफहमी पाल बैठे हैं कि इंटरनेट नंबरों से कॉलिंग कर वे पुलिस की रडार से बच जाएंगे, उन्हें समझना होगा कि आधुनिक तकनीक, साइबर जांच और डिजिटल साक्ष्यों के जरिए पुलिस उन तक आसानी से पहुंच सकती है। तकनीक के दुरुपयोग से अब अपराधियों की पहचान नहीं छिप सकती।

Leave a Comment

और पढ़ें