NCERT कक्षा 6 की इतिहास अध्याय 3 का

मनुष्य जिस तरह से आज रहता है उससे तो आप परिचित हैं। लेकिन क्या आपने सोचा है, कि हमारे पूर्वज हजारों वर्ष पहले कैसे रहते थे? उस समय दुनिया भर में कहीं भी खेती नहीं होती थी। न कहीं गाँव थे, न शहर। आज से 150 साल पहले तक लोगों का मानना था कि पृथ्वी पर आरंभ से ही जीवन था। पेड़-पौधे और मनुष्य को बनाने वाला ईश्वर था। लेकिन बाद में वैज्ञानिकों ने इस बात की खोज की कि पृथ्वी पर करोड़ों वर्ष पहले जीवन की उत्पत्ति हुई और उसका स्वरूप धीरे-धीरे बदलता रहा। कहा जाता है कि मनुष्य जिस रूप में आज है, वह लाखों वर्षों के क्रमबद्ध विकास का परिणाम है।

प्रारंभिक मानव के बारे में जानकारी कैसे मिलती है?

हजारों साल पहले जो लोग रहते थे, उनके बारे में हम ठीक-ठीक तो नहीं जानते हैं। लेकिन उस समय की बची हुई चीजों को देखकर और अपनी सूझबूझ से कुछ अनुमान जरूर कर सकते हैं। इस काम में पुरातत्ववेत्ताओं द्वारा उस समय के लोगों द्वारा प्रयोग में लाए गए…

और जंगलों में अपने आप उगे जंगली अनाज को काट लाते। वे ज्यादातर कंद, फल आदि खाते, साथ ही थोड़ा बहुत मांस भी। मांस उनका मुख्य भोजन नहीं था, क्योंकि उन लोगों के जो औजार मिले हैं उससे बड़ी संख्या में जंगली जानवरों का शिकार करना बहुत कठिन रहा होगा। दूसरी बात, जानवर उनसे ज्यादा शक्तिशाली और तेज दौड़ने वाले भी थे।

आरंभिक मानव को पहनने की चीजें भी जानवरों और पेड़ों से ही मिलती थीं। वे जानवरों की खाल साफ करके पहनते थे या पेड़ की पत्तियों और छाल से शरीर ढंक लेते थे। वे या तो पहाड़ी गुफाओं में रहते या पेड़ों की डालियों और पत्तों से छोटी-छोटी झोपड़ियाँ खड़ी कर लेते थे। वे लोग आग जलाना जान गए थे। उनके घरों में जो चूल्हे मिले हैं, उससे पता चलता है कि वे नियमित रूप से आग का इस्तेमाल करते थे। लोगों के झुंड में महिलाएँ और बच्चे भी रहते थे। पुरुष शिकार के लिए जाते जबकि महिलाएँ कंद-मूल, फल और अन्य जंगली अनाज इकट्ठा करतीं। समूह के लोग बच्चों का खास ख्याल रखते थे।

बाँट कर खाना

आरंभिक लोग साथ-साथ शिकार करते थे क्योंकि अकेले जानवरों को मारना कठिन होता था। भोजन लोगों द्वारा समूह में ही इकट्ठा किया जाता था और उसे सब लोग मिल-बाँटकर खाते थे। यह बहुत जरूरी था, क्योंकि जंगल से क्या मिलेगा इसका पक्का भरोसा तो होता नहीं था। उस समय लोगों के कई समूह अलग-अलग क्षेत्रों में रहते थे। उनके बीच शिकार और भोजन प्राप्ति को लेकर छोटी-मोटी लड़ाइयाँ भी होती थीं। कुल मिलाकर उस समय के लोगों का जीवन बहुत आराम से बीतता होगा। मुख्य काम भोजन इकट्ठा करना था जो जंगल से प्राप्त हो जाता। इसके लिए उन्हें बहुत अधिक परिश्रम नहीं करना पड़ता था।

आरंभिक मानव के जीवन का महत्वपूर्ण पक्ष : इधर-उधर घूमना

एक समूह में रहने वाले आरंभिक मानव एक सीमित क्षेत्र के भीतर घूमते-फिरते रहते थे। यह दायरा उनके निवास स्थल से चारों दिशाओं में होता। ये लोग छोटे-छोटे समूहों में बँटकर चारों दिशाओं में जाते, इसके पीछे एक निश्चित वजह होती थी। जैसे एक खास क्षेत्र में फलों-पौधों और जानवरों की संख्या और उपलब्धता सीमित रहती थी, जिसे वे समाप्त कर देते थे। अतः भोजन की तलाश में वे इधर-उधर घूमते थे। वे जानवरों के शिकार करने के क्रम में भी उनके पीछे-पीछे चले जाते। उन लोगों को पेड़-पौधों में फल-फूल आने का मौसम पता था। इसलिए लोग उनकी तलाश में उपयुक्त मौसम के अनुसार दूसरे क्षेत्रों में घूमते थे। संभवतः आस-पास के जल स्रोतों जैसे नदियों, झीलों आदि के सूख जाने के कारण

भी पानी की तलाश में इधर-उधर जाते होंगे। वे लोग अपनी यात्रा पैदल ही किया करते थे।

आरंभिक मानव के औजार

शिकारी मानव के पास कैसे-कैसे हथियार व औजार थे जरा सोचो। उस समय लोहा, ताँबा जैसी धातुओं के बारे में लोगों को पता नहीं था। अतः अपने आस-पास मिलनेवाले पत्थर, लकड़ी, जानवरों के सींग और हड्डियों को नुकीला बनाकर वे औजार बनाते थे। वे पत्थर के टुकड़े को घिसकर नुकीला और धारदार बना देते थे। साथ ही, वह हाथ से पकड़ने लायक औजारों को बनाते थे।

धीरे-धीरे वे इस कला में माहिर होते गए और पत्थर के बारीक औजार बनाने लगे। वे पत्थर के छोटे और बारीक टुकड़ों को किसी लकड़ी के हत्थे पर लगाकर तेज औजार का काम लेते थे। उस समय औजार बनाने के लिए अलग से कोई कारीगर नहीं था। समूह के सब लोग औजार बनाया करते थे। पत्थर और लकड़ी के औजारों का उपयोग शिकार

पेड़ों को काटने या उनकी छाल छीलने, जानवरों के खाल उतारकर पहनने लायक बनाने इत्यादि कामों में करते थे। वे लकड़ी, सीप, हड्डी, हाथी-दाँत आदि की मालाएँ भी बनाते थे।

चित्र और नाच

शिकारी लोग गुफा के अंदर दीवारों पर रंगीन चित्र भी बनाया करते थे। वे रंगीन पत्थरों को घिस कर रंग तैयार करते थे और बाँस के बुश से चट्टानों पर चित्र बनाते थे। इन लोगों द्वारा बनाए चित्र भीमबेटका की गुफाओं में पाया गया है। चित्र में ज्यादातर पशुओं जैसे बैल, गाय, भैंस, हिरण इत्यादि के थे। चित्रों के बनाने के अलावा उनके जीवन में एक और महत्वपूर्ण चीज नाच था। वे सब मिलकर देर तक नाचते थे।

महत्वपूर्ण प्रश्न

प्रारंभिक मानव औजार कैसे बनाते थे?
प्रारंभिक मानव चित्र कहाँ बनाते थे?
प्रारंभिक मानव के जीवन में नाच का क्या महत्व था?
भीमबेटका की गुफाएँ क्यों प्रसिद्ध हैं?

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